15 माह के अद्वैत ने विलोम शब्द सुनाकर बनाया रिकॉर्ड
➤ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया ने 10 जुलाई 2026 को दर्ज की उपलब्धि
➤ खेल-खेल में सीखने वाले नन्हे अद्वैत की प्रतिभा ने परिवार को किया गौरवान्वित
चंबा/सिहंता। उम्र महज 15 माह, लेकिन याददाश्त ऐसी कि सुनने वाले भी हैरान रह जाएं। सिहंता के नन्हे अद्वैत सिंह ठाकुर ने बेहद कम उम्र में अपनी असाधारण स्मरण शक्ति का परिचय देते हुए विलोम शब्द सुनाने की प्रतिभा के दम पर एक खास उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस प्रतिभा को वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया ने मान्यता देते हुए 10 जुलाई 2026 को उनके नाम यह रिकॉर्ड दर्ज किया।
अद्वैत की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है। इतनी कम उम्र में बच्चे की प्रतिभा को रिकॉर्ड के रूप में पहचान मिलना परिवार के लिए गर्व का विषय है। पिता अभिषेक ठाकुर, माता वंदना ठाकुर, दादा बचितर सिंह ठाकुर और दादी नीलम ठाकुर ने अद्वैत की इस उपलब्धि पर खुशी जताई है।
खेल-खेल में शुरू हुई सीखने की कहानी
अद्वैत की सीखने की शुरुआत किसी औपचारिक पढ़ाई से नहीं, बल्कि बिल्कुल सहज और घरेलू माहौल में हुई। परिवार के अनुसार, उसकी मां वंदना ठाकुर उसे सुलाते समय अलग-अलग शब्दों से परिचित करवाती थीं। मां के लिए यह बच्चे के साथ बिताया जाने वाला सामान्य समय था, लेकिन धीरे-धीरे यही शब्द अद्वैत की स्मृति में बसने लगे।
परिवार बताता है कि अद्वैत सोते-सोते सुनी हुई बातों और शब्दों को भी याद रखने लगा। जब उसे बाद में किताबों और शब्दों से जोड़ा गया तो उसकी सीखने की क्षमता और अधिक स्पष्ट होकर सामने आने लगी।
खास बात यह रही कि अद्वैत केवल शब्दों को सुनकर दोहराता ही नहीं था, बल्कि उन्हें याद रखकर उनके विलोम शब्द भी बताने लगा। उसकी इसी असाधारण स्मरण शक्ति ने परिवार को महसूस कराया कि बच्चे में सामान्य से अलग सीखने की क्षमता है।
15 माह की उम्र में मिली रिकॉर्ड की पहचान
12 मार्च 2025 को जन्मे अद्वैत ने बेहद कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल की है। 10 जुलाई 2026 को वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया की ओर से उनकी उपलब्धि दर्ज की गई।
परिवार के लिए यह क्षण इसलिए भी खास है क्योंकि अद्वैत की प्रतिभा किसी विशेष दबाव या कठिन प्रशिक्षण का परिणाम नहीं बताई जा रही है। परिवार के अनुसार, उसने रोजमर्रा के माहौल में खेल-खेल में शब्दों को सुना, समझा और याद किया।
यही सहज सीखने की प्रक्रिया धीरे-धीरे उसकी खास पहचान बन गई।
मां के शब्दों से बनी याददाश्त की मजबूत नींव
अद्वैत की इस कहानी में उसकी मां वंदना ठाकुर की भूमिका भी खास रही। परिवार के अनुसार, वह बच्चे को सुलाते समय अलग-अलग शब्द बोलती और उससे परिचित करवाती थीं। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही छोटी-छोटी बातें आगे चलकर अद्वैत की असाधारण स्मरण शक्ति की नींव बनेंगी।
बच्चे अक्सर अपने आसपास की आवाजों, शब्दों और गतिविधियों से सीखते हैं। अद्वैत के मामले में भी परिवार ने इसी सहज प्रक्रिया को जारी रखा। किताबों और शब्दों से परिचय बढ़ने के साथ उसने उन्हें याद करना और उनके बीच संबंध समझना शुरू किया।
परिवार के लिए गर्व का क्षण
अद्वैत की उपलब्धि से पिता अभिषेक ठाकुर और मां वंदना ठाकुर के साथ दादा बचितर सिंह ठाकुर और दादी नीलम ठाकुर भी बेहद खुश हैं। परिवार का कहना है कि इतनी कम उम्र में बच्चे ने जिस तरह शब्दों को याद किया और विलोम शब्द बताने की क्षमता दिखाई, वह उसके असाधारण स्मरण शक्ति का परिचायक है।
परिवार के लिए यह केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि बच्चे की प्रतिभा को पहचान मिलने का अवसर है। अद्वैत की उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र में भी खुशी का माहौल बनाया है।
बच्चों की प्रतिभा को दबाव नहीं, प्रोत्साहन की जरूरत
अद्वैत की कहानी इस बात की ओर भी ध्यान खींचती है कि छोटे बच्चों में सीखने की क्षमता को विकसित करने के लिए हमेशा औपचारिक पढ़ाई या दबाव की जरूरत नहीं होती। कई बार रोजमर्रा की छोटी-छोटी गतिविधियां, बातचीत, कहानियां और किताबें बच्चों के लिए सीखने का सबसे सहज माध्यम बन जाती हैं।
बच्चे को उसकी रुचि के अनुसार सीखने का अवसर और परिवार का प्रोत्साहन मिले तो वह अपनी क्षमता को बेहतर तरीके से सामने ला सकता है। अद्वैत की कहानी इसी सहज सीखने और पारिवारिक सहयोग का उदाहरण बनकर सामने आई है।
15 माह की उम्र में विलोम शब्दों की पहचान और उन्हें सुनाने की क्षमता ने नन्हे अद्वैत को एक अलग पहचान दी है। उसकी यह उपलब्धि परिवार के लिए गर्व के साथ-साथ दूसरे अभिभावकों के लिए भी एक संदेश है कि बच्चों की जिज्ञासा और सीखने की इच्छा को खेल-खेल में आगे बढ़ाया जाए।



